Ashwini Rai

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1. अपनी पुस्तक लिखने की यात्रा के बारे में कुछ बताइए।

उत्तर :-
यात्रा मजेदार थी अथवा रही। यह उन दिनों की बात है जब मैं कोलकाता में नौकरी करता था। एक आईंटी फर्म थी, उस समय फ्लॉपी डिस्क का जमाना था और सिडी अभी अभी आया था और वह सिर्फ फर्मस के पास हुआ करता था।
एक दिन सीडी लेकर हम कहीं जा रहे थे और उस समय धीमी बारिश भी हो रही थी। अतः उसे बचाने के लिए हमने उसे शर्ट के अंदर छुपा लिया था।
इसे देख एक पुलिसवाले ने हमें बड़ा बुरा भला कहा। बिहारी जान बड़े बुरे शब्दों का उपयोग तक कर डाला।
हमने वहीं कसम खाई अब बिहार में भीख मांग लूंगा मगर कभी और राज्य में नौकरी नहीं करूंगा।
नौकरी छोड़ दी उसी समय और वापस आ गया और लिख डाली बिहार के प्रत्यक्ष पांच हजार साल के इतिहास को।
यही मेरे लेखन की संक्षिप्त यात्रा रही। बाकी मिलने पर कभी।
2. अपनी किताब के बारे में कुछ बताइए।
उत्तर :-
यह पुस्तक बिहार के उस गौरवपूर्ण इतिहास को बखान करता है, जिसे आज के हम युवाओ ने भूला कर बिहार के नाम को मात्र एक आलोचनात्मक शब्द बना रखा है। बिहार के इतिहास के बिना भारत के इतिहास कि कल्पना भी नही कि जा सकती, तो ऐसा क्या हुवा जो स्वर्णिम इतिहास सिर्फ इतिहास बन कर ही रह गया ? यह पुस्तक बिहार के अतित पर जहां गर्व करना चाहती है वहीं उसके अंगो के नोचे जाने पर सिसकती भी है, चलिये हम भी उसके साथ कुछ कदम चलते हैं, कुछ गर्व करते हैं और कुछ……?
3. यह कहा जाता है कि लेखक एक और रचनाकार होते हैं, क्या आप इससे
सहमत हैं?
उत्तर :-
जी सहमत हूँ। हर विधा कि समझ ही तो लेखनी को मजबूत बनाता है।
4. परिवार के अलावा आपकी प्रेरणा।
उत्तर :-
कोलकाता का पुलिसवाला…जिसने बिहार और बिहारी को अपमानजनक शब्द से संबोधन किया। यही वजह रही मेरी पहली पुस्तक, बिहार – एक आईने कि नजर से के लेखन की। हर कोई जान सके बिहार के इतिहास को।
5. अपने बारे में कुछ बताइए।
उत्तर :-
मैं अश्विनी हूँ, मेरे पास अपने पिताश्री श्री गिरिजा राय एवं माता श्रीमती इंदु राय के नाम के अलावा ऐसी कोई खास पहचान नहीं है। ग्राम मांगोडेहरी, डाक खीरी, जिला बक्सर बिहार का निवासी हूँ। अपनी पत्नी अनीता एवं दो पुत्र आर्यन एवं कृष्णा के साथ बक्सर में रहता हूँ।
6. खुद की पुस्तक पकड़कर एक विशेष भावना हमेशा होती है । आपके लिए यह
कैसा एहसास था?
उत्तर :- एक अजीब सी खुशी, जिसे हम डर और उत्साह का कॉकटेल भी कह सकते हैं…
7. पसंदीदा लेखक कौन हैं? आपकी पसंदीदा पुस्तक क्या है?
उत्तर :-
गुनाहों का देवता, जिसके लेखक हैं हिंदी उपन्यासकार श्री धर्मवीर भारती जी। यह उपन्यास उनके शुरुआती दौर की है और यह सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में से एक है।
8. पाठक की(अच्छी और बुरी ) प्रतिक्रिया की कुछ यादें साझा करें।
उत्तर :-
विषय पर काफी सराहना मिली, और प्रूफ रीडिंग के लिए सलाह भी।
9. अन्य शौक क्या हैं ?
उत्तर :-
पहला और आखिरी भी, सिर्फ लिखना और पढ़ना।
10. लेखन की अगली योजना क्या है ?
उत्तर :-
कार्य चल रहा है, एक पुस्तक पूरी हो चुकी बस प्रकाशन बाकी है, दूसरी और तीसरी पूरी होने के कगार पर हैं। चौथी भी आधी हो चली है।
11.आपको कभी लगता है कि लेखन कठिन है।
उत्तर :-
बिल्कुल नहीं! विषय पर पूरी तैयारी हो तो।
12. आपने पहली बार कब महसूस किया कि भाषा में दिलों को बांधने की शक्ति है ?
उत्तर :-
यह सवाल तो सीधा ईश्वर के आस्तित्व पर सवाल उठाता है। भाषा शब्दों के मेल से बनता है, शब्द अक्षर से और अक्षर अ+क्षर से। इसका सीधा मतलब हुवा जिसका क्षरण ना हो सके अर्थात जो कभी खत्म ना हो सके। ईश्वर के अलावा ऐसा कौन है जो समाप्त नहीं हो सकता। वो सदा हृदय में वास करता है।
13. आप किस शैली को लिखना पसंद करते हैं ?
उत्तर :- गद्य आसान है, अतः यही शैली हमें पसंद है।
14. लिखते समय और प्रकाशित होते समय आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उत्तर :-
लिखते समय विषय संचालन एवं एकत्रीकरण उबाऊ और चैलेंजिंग लगा। दूसरी और महत्वपूर्ण चुनौती रही प्रूफरीडर की। अर्थ की व्यवस्था तो महत्वपूर्ण है ही।
15. आपके प्यारे पाठकों के लिए कुछ शब्द।
उत्तर :- सहयोग बनाए रखें, हम अपने लेखनी में आप के सलाह को सदा स्थान देते रहेंगे।
अश्विनी राय ‘अरुण’
ग्राम – मांगोडेहरी
डाक – खीरी
जिला – बक्सर बिहार
७७३९५९७९६९
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