Sajal Mehr

पनी पुस्तक लिखने की यात्रा के बारे में कुछ बताइये ?

  1. मेरी पुस्तक लिखने की यात्रा बहुत ही अनोखी रही . बचपन से ही कुछ अलग करने की चाहत थी , स्कूल व् कॉलेज में परफार्मिंग आर्ट्स में रूचि रही ,चाहे वो ड्रामा हो या सिंगिंग हो. स्पोर्ट्स में भी मन खूब लगा और अपनी फुटबॉल टीम को कई शहरों में टूर्नामेंट्स भी जितवाए . लेखन वाले कारवां की शुरुआत तो शायद कॉलेज के दिनों में ही हो गयी थी परन्तु उन दिनों के लिखने के स्टाइल में और आज की मेरी लिखावट में बहुत असमानता है. ये कहना गलत नहीं होगा की उम्र के साथ मेरी नज़्मों में भी पौढ़ता देखने को मिलती है . दोस्तों के बीच मेरी शायरियां काफी प्रचलित थी, इन्ही कुछ दोस्तों ने मुझे प्रोत्साहित किया “हसरतें” को एक पुस्तक के रूप में दुनिया के सामने रखने का…मैं शुक्रगुज़ार हूँ उन सभी लोगों का जो मे्रे इस कारवां में शामिल रहे और जिन्होंने तत्पर मेरा साथ दिया..

अपनी किताब के बारे में कुछ बताइये

  1. “हसरतें” एक ६० कविताओं व् नज़्मों का संग्रह है. ये नज़्में हमारे जीवन के अलग अलग पढ़ाओ को दर्शाती हैं. कभी कोई नज़्म बचपन के आंगन में आपको तनहा छोड़ आती है , तो कोई नज़्म आपके अतीत को आपके वर्तमान से मिला देती है . कहीं माँ के अंचल में सर रखकर आप दो बातें कर रहे होते हो और किसी पल घर के बुज़र्ग़ो को रोते देख घर की नींव को धुंधली पाते हो .

“हसरतें” की ख़ास बात ये है की इनमे कई लेख आपके सोचने पर विवश कर देते हैं , जैसे “बगावती कतरे लहू के ” , “दो कमरे “, “चौबीस घंटे ” और ऐसे अन्य कई नज़्में हैं जिन्हे पढ़ने के पश्चात रीडर एक गहरे सवाल में डूब जाता है और कई प्रश्नो से खुद को घिरा पाता है.

ये कहा जाता है लेखक एक और रचनाकार होते हैं, क्या आप इससे सहमत हैं ?

  1. जी बिलकुल मैं इससे पूर्णत: सहमत हूँ . वो कहते हैं “जहाँ न पहुंचे रवि , वहां पहुंचे कवी “.

कवी की कल्पना की कोई सीमा नहीं होती. वो किसी भी चीज़ को सिर्फ अपनी कलम की ताकत से दर्शा सकता है . कविता का अद्भुत सौंदर्य इसी बात में है की उसकी कोई सीमा नहीं होती , वो सिर्फ कवी की सोच पर प्रतिबद्ध है.

परिवार के इलावा आपकी प्रेरणा

  1. परिवार ही सबसे बड़ी प्रेरणा है . उसके साथ ही कुछ अच्छे दोस्त और कुछ शुभचिंतक रीडर्स हैं जिन्हे मुझसे बहुत अपेक्षा है …मेरे लिए वो ही सबसे बड़ी प्रेरणा है

अपने बारे में कुछ बताइये

  1. पूछते हैं वो ग़ालिब कौन है , कोई बताये की हम बताएं क्या

मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में हुआ . प्राथमिक शिक्षा कानपूर के उत्तीर्ण की और उसके बाद इंजीनियरिंग करने ग़ाज़िआबाद चला गया. इंजीनियरिंग के बाद भी पढ़ने में रूचि कायम रही तो सोचा MBA की पढाई करूँ इसलिए सिम्बायोसिस से MBA की डिग्री प्राप्त की. दिन अच्छे थे इसलिए आसानी से मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी जॉब लग गयी और मायानगरी मुंबई ने मेरा स्वागत किया . इस सभी के दौरान एक चीज़ जो हमेशा साथ रही वो था शायरियों का शौक और कुछ हल्का फुल्का लिखने की आदत . मुंबई के बाद मैं लंदन में एक साल रहा और फिर कई विदेश यात्राओं का मौका मिला फ़िलहाल मैं बैंगलोर शहर में स्थित हूँ और एक कंपनी में कार्यरत हूँ

खुद की पुस्तक पकड़कर एक विशेष बह्व्ना हमेशा होती है ! आपके लिए यह कैसा एहसास था ?

  1. बात इसमें नहीं की तुम बनो काफिले का हिस्सा

बात तो इसमें है की तुमसे हो कारवां

बहुत ही कठिन सवाल है क्यूंकि ये एक अविस्मरणिय एहसास है ! विशेष भावना तो अवश्य हुई पर उस भावना को एक नाम देना बहुत मुश्किल कार्य है ! वो लम्हा जिस वक़्त आप अपनी पहली पुस्तक को पहली बार अपने हाथो में पकड़ते हो उस लम्हे को बयान करना बहुत मुश्किल है , वो मंज़र मुझे कभी न भुला देने वाली ख़ुशी देके गया. एक अलग अहसास होता है जब आप पुस्तक पे अपना नाम देखते हो , कॉपीराइट्स के पन्नो में आपका नाम होता है . ये वो घडी होती है जब आपको खुद पे प्यार आता है और एक बहुत बड़ी ज़िमेदारी का एहसास भी होने लगता है .

यक़ीनन ये एक बहुत स्पेशल मोमेंट होता है एक राइटर की ज़िन्दगी का और शायद उससे भी बड़ा वो पल जब वो अपनी पुस्तक को किसी रीडर को पहली बार सिग्न करके देता है .

पसंदीदा लेखक कौन है ? पसंदीदा पुस्तक कौन सी है ?

  1. पसंदीदा लेखकों की सूची लम्बी है पर अगर मुझे मे्रे ३ सबसे अज़ीज़ लेखकों के नाम नाम लिखने हो जिनका लिखा पढ़के मुझेमें कई भाव पैदा होते हैं और जो मुझे विवश करते है लिखने पे तो उनमे सबसे पहले नाम आएगा गुलज़ार साहब का.

मैं गुलज़ार साहब का बहुत बड़ा फैन हूँ और उनकी लिखी लगभग सभी किताबें पढ़ चूका हूँ . उनके लिखने का स्टाइल मुझे बेहद पसंद है . जिस तरह किसी भी मंज़र को बयां करने का फन गुलज़ार साहब की कलम को हासिल है वो किसी भी और लेखक को नहीं है .

मुझे राहत इन्दोरी और जावेद अख्तर जी का भी लिखने का अंदाज़ बहुत पसंद है . राहत जी का अंदाज़े ए बयां का कोई तोड़ नहीं .

पसंदीदा पुस्तको में “रात पश्मीने की “, ” पुखराज”, “प्लूटो ” , “ख्वाबों के गाओं में” और “नाराज़ ” शामिल हैं

पाठक की (अच्छी और बुरी ) प्रतिक्रिया की कुछ यादें साझा करें

  1. एक बार एक पाठक का मे्रे पास फ़ोन आया और वो फ़ोन पे मेरी पुस्तक का विश्लेषण करते करते भावुक हो गयीं और रोने लगी . उनका कहना था की कुछ नज़्में उनके दिल को इस तरह छू गयी की वो अपने भावो को रोक नहीं पायी और मुझसे बात करना उन्होंने बेहतर समझा . मैंने जैसे तैसे करके उन्हें बहुत समझाया और कई रोचक बातें बताई की उन नज़्मों के पीछे मेरी क्या सोच थी. फिर माहौल थोड़ा बेहतर हुआ , पर पाठको का इस कदर नज़्मों से जुड़ना और ऐसी प्रतिक्रिया देना मुझे काफी पसंद आया.

एक बार मैं एक सभागार में था जहाँ काव्य गोष्टी का कार्यक्रम चल रहा था , मैंने वहां अपनी लिखित नज़्म “कब्रिस्तान ” और “अतीत और मैं ” सुनाई जिसे श्रोताओ ने बहुत सराहा , काफी तारीफ भी मिली परन्तु कार्यक्रम के बाद एक महाशय ने मुझे बुलाया और कहा आपको कुछ मसालेदार लिखना चाहिए , कुछ हास्य लिखना चाहिए वो श्रोताओं को अधिक पसंद आएगा …इस बात से मैं बिलकुल इत्तेफाक नहीं रखता था इसलिए मैंने उन्हें समझाया वो मेरा लिखने का तरीका नहीं है और न ही मैं मसालेदार लेख लिख सकता हूँ ..मैं इस बात से खुश हूँ जो लोग मुझे सराहते हैं वो मे्रे लेख को बाखूबी समझते हैं और उससे जुड़ते हैं. शायद उन महाशय को भयानक रस पसंद नहीं रहा होगा, पर मेरा मानना है हर रस कीअपनी खूबी होती है और उसका आदर करना चाहिए

अन्य शौक क्या हैं

  1. मुझे गायकी का बहुत शौक है और इसमें कई पुरुस्कार भी मिले हैं. इसके अतिरिक्त मुझे मिमिक्री , और स्टेज एंकरिंग का भी शौक है. एक ऐसी बात भी है जो सिर्फकुछ लोग ही जानते हैं , मुझे टैरो कार्ड रीडिंग का ज्ञान है और अमेरिकन टैरो एसोसिएशन से प्रमाण भी जल्द ही हासिल होने वाला है .

लेखन की अगली योजना क्या है

  1. मैं अपनी अगली पुस्तक पे काम कर रहा हूँ , आशा करता हूँ की इस साल की आखिरी तक वह प्रकाशित होगी. ये हसरतें की तरह नज़्मों की एक पुस्तक होगी हालाकि जिन लोगो ने उस किताब के कुछ अंश पढ़े हैं उन्होंने सराहना की है .

आपको कभी लगता है लेखन कठिन है ?

  1. लिखना कठिन नहीं है , अच्छा लिखना बहुत कठिन है. मुझे लगता है एक उम्दा ग़ज़ल, नज़्म, कविता लिखने में कभी कभी कई दिन, हफ्ते लग जाते हैं . एक गहरी सधी सोच और परिश्रम का फल होता है एक अच्छा लेख. कवी या लेखक की पहचान तब होती है जब वो अपने लिखे से पाठको के बीच एक छवि बना सकता है , अपने शब्दों के ज़रिये वो एक अलग दुनिया में ले जा सकता है और अगर ऐसा करने में वो सफल होता है तो यकीनन उसकी कलम की स्याही कबीले तारीफ है पर ऐसा करना बहुत मुश्किल होता है.

आपने पहली बार कब महसूस किया भाषा में दिलों के बाँधने की शक्ति है

  1. एक रोज़ जब मुझे मे्रे अज़ीज़ दोस्त ने गुलज़ार साहब की कुछ किताबें लाकर दी और मैंने उन्हें पढ़ा तब मुझे समझ आया की भाषा एक बहुत ही भरी माध्यम है लोगो के दिलों के बांधने का . उसी दौरान मैंने राहत साहब का ऑनलाइन शो देखा जो कुवैत में हुआ था, उनके अंदाज़ ए बयां ने लोगो का दिल जीत लिया था और सभागार में बैठे अलग अलग देश से पहुंचे लोग सभी उनके रंग मेंरंग चुके थे . मेरे यकीन पे उस वक़्त मोहर लग गयी जब मैंने निदा फ़ाज़ली और ग़ालिब की शायरियां पढ़ी और समझा की भाषा कोई भी हो , अगर इरादा नेक है तो यह बखूबी दिलों के बांधती है.

आप किस शैली में लिखना पसंद करते हैं

  1. मुझे हिंदी में लिखना पसंद है . और आप अधिकतर मुझे रौद्र रस या भयानक रस में ही लिखते पाएंगे

लिखते समय और प्रकाशित होते समय आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा ?

  1. लिखते समय और प्रकाशित होते समय की चुनौतियाँ बहुत अलग होती हैं . लिखते समय लेखक की दुविधा होती है उसके विचारों को सही अल्फ़ाज़ों के ज़रिये कागज़ पे उतरना. कई बार विचार अच्छे होते हैं परन्तु उन्हें संजोने वाले शब्द नहीं कई बार शब्दों की लड़ी बेहतर होती है पर विचार हलके होते हैं. इस तालमेल को बैठना ही सबसे बड़ी चुनौती है . हर बार कुछ नया लिखना , एक ही स्टाइल ऑफ़ राइटिंग को न फॉलो करते हुए कुछ अलग लिखना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है .

प्रकाशित होते समय सबसे बड़ी चुनौती है एक सही प्रकाशक को ढूंढ़ने की. ऐसा प्रकाशक जिसे आप के काम पे भरोसा हो और उसे आपकी शैली और भाषा की समझ हो . कई प्रकाशक सिर्फ पैसे बनाने के लिए आपकी किताब प्रकाशित करने को तैयार हो जाते हैं , ये गलत है . एक अच्छे प्रकाशक का काम है न सिर्फ आपकी सहायता करे बल्कि किताब को अधिक से अधिक पाठको तक पहुचाये. प्रूफ रीडिंग, कवर डिजाइनिंग और एडिटिंग में बहुत अधिक समय लगता है . मेरी नज़र में नज़्में लिखना आसान है पर बड़ी चुनौती है किताब का प्रकाशन और उससे जुडी हुई दिक्कतों का धैर्य से सामना करना .

आपके प्यारे पाठको के लिए कुछ शब्द

  1. एक लेखक अपने पाठको के बिना बिलकुल अधूरा है . लेखक की कलम चलती ही है तो अपने पाठको के लिए और मैं हमेशा शुक्रगुज़ार रहूँगा अपने पाठको का. मुझे हमेशा इंतज़ार रहता है उनके फीडबैक का .

आप सभी को मेरा बहुत बहुत आभार . खुश रहे, लिखते रहे, और पढ़ते रहे.

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