Shivangi Purohit

1. अपनी पुस्तक लिखने की यात्रा के बारे में कुछ बताइए ।
उत्तर :- 2 साल पहले जब पत्रकारिता करने का सपना टूटा तो कुछ कर दिखाने की जिद जागी। घर की जिम्मेदारियों के कारण अपने मन का क्षेत्र नहीं चुन पाई थी। लेकिन लेखन ने मुझे एक नया रास्ता दिखाया। पुराने उपन्यास काफी पढ़ती थी। इसीलिए सबसे पहले 80 के दशक पर आधारित एक उपन्यास लिखा। लेखन की शुरुआत अखबारों में लेख लिखने से शुरू हुई थी और अब 2 साल में 100 से ऊपर प्रकाशित लेख और तीसरी किताब लिख चुकी हूं।
2. अपनी किताब के बारे में कुछ बताइए ।
उत्तर :- पहली किताब 2017 में सरस्वती उपन्यास लिखा दूसरी किताब आरक्षण 70 साल 2018 में लिखा और इस वर्ष नया उपन्यास सांझी एक अधूरी कहानी लिखा जो एक लड़की की असल जिंदगी पर आधारित है।
3. यह कहा जाता है कि लेखक एक और रचनाकार होते हैं, क्या आप इससे
सहमत हैं?
उत्तर :- मै इस कथन से सहमत हूं। लिखी गई कोई भी किताब एक नई जिंदगी होती है। जिसे लेखक रचता है। किसी भी किताब में लिखी गई कोई भी घटना या कहानी काल्पनिक नहीं होती वो किसी न किसी के हुआ होता है बस लेखक उस कहानी को लोगो तक पहुंचता है और लोगों को कहानी के माध्यम से प्रेरित करता है।
4. परिवार के अलावा आपकी प्रेरणा ।
उत्तर :- पुराने समय के रचनाकार मेरी प्रेरणा है। जैसे प्रेमचंद, चन्द्रकला सौनरेक्सा, शरत दा।
5. अपने बारे में कुछ बताइए ।
उत्तर :- मै पिपरिया मप्र में रहती हूं। अभी बी ए द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत हूं। मैने स्कूल की पढ़ाई विद्या भारती से संबद्ध सरस्वती शिशु मंदिर से की है। मेरे पापा एक शिक्षक है और मां का देहांत हो चुका है।
6. खुद की पुस्तक पकड़कर एक विशेष भावना हमेशा होती है । आपके लिए यह
कैसा एहसास था ?
उत्तर : एक समय था जब मेरी कोई पहचान नहीं थी। यहां तक कि मेरे रिश्तेदार भी मेरी कोई खास इज्जत नहीं करते थे। एक गांव में रहने वाली लड़की थी बस। लेकिन जब आज अपनी पुस्तक हाथ में पकड़ती हूं तो गर्व होता है कि मैंने कुछ ऐसा किया जिससे आज हर कोई मेरी इज्जत करता है।
7. पसंदीदा लेखक कौन हैं? आपकी पसंदीदा पुस्तक क्या है?
उत्तर :- पसंदीदा लेखक चन्द्रकला सौनरेकसा है और उनका उपन्यास “वंचिता” मुझे बहुत पसंद है जिसे मै 5 बार पढ़ चुकी हूं।
8. पाठक की(अच्छी और बुरी ) प्रतिकिया की कुछ यादें साझा करें ।
उत्तर :- पहले उपन्यास को पढ़कर कुछ लोगों की एक जैसी प्रतिक्रिया आई कि पढ़कर वे रो दिए थे। उस उपन्यास को पढ़कर विपुल शरण श्रीवास्तव मेरे संपर्क में आए जो अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर है। इन्होंने सबसे अच्छी प्रतिक्रिया दी और अब तक मेरा मार्गदर्शन करते आए है।
बुरी प्रतिक्रियाएं अक्सर आरक्षण पर लिखे किसी लेख पर मिल जाती थी। एक बार किसी व्यक्ति ने तो मुझे रेकिस्ट तक कह दिया था।
9. अन्य शौक क्या हैं?
उत्तर :- मुझे किताबें पढ़ना और नई नई चीजें पकाना बहुत पसंद है। किचिन से मेरा एक अलग ही जुड़ाव है।
10.लेखन की अगली योजना क्या है ?
उत्तर :- अभी अपनी तीसरी किताब सांझी एक अधूरी कहानी में व्यस्त हूं। आगे भी लिखती रहूंगी।

11.आपको कभी लगता है कि लेखन कठिन है ।
उत्तर :- जो हम पर बीता हो वह लिखना आसान है लेकिन कल्पना कर के उसे पन्नों पर उतरना थोड़ा कठिन है लिखने से पहले वो भाव खुद को महसूस करने होते हैं।
12. आपने पहली बार कब महसूस किया कि भाषा में दिलों को बांधने की शक्ति है ?
उत्तर :- सरस्वती उपन्यास कई लोगों ने पढ़ा और सबने एक बात समान कहीं कि पढ़ने बैठे तो खत्म किए बिना उठने का मन नहीं होता। हर पन्ने को पढ़कर आगे पढ़ने की इच्छा तीव्र हो जाती है।
13. आप किस शैली को लिखना पसंद करते है                                                                                                 मै उन्हीं शब्दों को लिखती हूं जो हर उम्र के पाठक समझ में आए। आसान शब्द लिखती हूं ताकि पढ़ते वक्त पाठक बोर न हों।

14.लिखते समय और प्रकाशित होते समय आपको किन चुनौतियों का सामना
करना पड़ा ?
उत्तर :- मेरी सबसे बड़ी चुनौती थी प्रकाशन। पहली और दूसरी किताब मैंने एक ऐसे प्रकाशन से छपवाई को पैसों का भूखा था। दोनों किताबों के प्रकाशन में उसने मुझसे 1 लाख से ऊपर रुपए लिए और किताब बेचने में बिल्कुल भी सहायता नहीं की। और न हीं मुझे 1 रुपए की रॉयल्टी मिली। हर प्रकाशन ऑनलाइन डिमांड के हिसाब से किताबे छापकर बेचता है लेकिन वो प्रकाशन बिना पैसों के किताबें नहीं छपता। इससे सबक लेकर मैंने तीसरी किताब में प्रकाशन बदल लिया

15. आपके प्यारे पाठकों के लिए कुछ शब्द ।

उत्तर : सभी पाठकों को सहयोग के लिए धन्यवाद। आशा करती हूं आगे भी आप सभी का सपोर्ट और प्यार मुझे मिलता रहेगा।

– शिवांगी पुरोहित

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