Vinayak Sharma

 

विनायक शर्मा का साक्षात्कार

  1. अपनी पुस्तक लिखने की यात्रा के बारे में कुछ बताइए।

उत्तर :- मैं बचपन से ही अपनी माँ और घर की आसपास की महिलाओं को कुछ बात करते हुए सुनता था। उस समय मुझे थोड़ा कम समझ में आता था, मगर जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ तो बातें समझ में आने लगीं। एक दिन मेरे एक दोस्त ने किसी और गाँव की एक लड़की के बारे में बताया कि किसी राजनेता के बेटे ने एक लड़की के साथ कुछ गलत किया और फिर उस लडकी के बाप ने झटपट उसकी शादी कर दी।

उस नेता के बेटे पर न तो कोई केस हुआ, न ही यह बात ज्यादा लोगों को पता लगी। इसी घटना के कारण मैं “और कितनी निर्भया” लिखने के लिए प्रेरित हुआ। क्योंकि बहुत सारे रेप के मामले रजिस्टर हो रहे हैं, लेकिन फिर भी उससे कहीं ज्यादा केस हिंदुस्तान में ऐसे हैं जो रजिस्टर्ड ही नहीं होते हैं।

  1. आपकी किताब के बारे में कुछ बताइए।

उत्तर:- यह किताब एक ऐसी लड़की प्रिया के बारे में है, जिसकी जिन्दगी किसी भी अन्य लड़की की जिंदगी की तरह ही चल रही होती है। उसकी जिन्दगी में कॉलेज होता है, पढाई होती है, प्यार होता है। उसकी माँ नहीं होती है मगर बाप का प्यार होता है।

मगर उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा घटता है जो उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है। लोग उसे केस न लड़ने की सलाह देते हैं, मगर वो, उसके पिता और उसका चचेरा भाई तीनों दृढ़ता से लड़ते हैं और उनकी जीत भी होती है।

  1. यह कहा जाता है कि लेखक एक और रचनाकार होते हैं, क्या आप इससे सहमत हैं?

उत्तर:- एक आम इंसान समाज में चल रहे किसी घटनाक्रम को देखता है, और फिर आगे बढ़ता चला जाता है। मगर वहीं एक लेखक दिनचर्या की चीजों को भी अलग ढंग से देखता है और जब उसे अपनी लेखनी के रूप में प्रस्तुत करता है, तब लोगों को यह एहसास होता है कि अरे ये तो रोज उनके साथ भी हो रहा है।

कहा गया है न कि ‘साहित्य समाज का दर्पण होता है।’ वास्तव में लेखक उन्हीं चीजों को थोड़े अलग ढंग से हमें दिखाता है जो हम रोज देख रहे होते हैं। जिससे कभी हमारा मनोरंजन होता है, कभी हमें कुछ सीखने को मिलता है, तो कभी हमारी आँखें खुलती हैं। वस्तुतः हम यह कह सकते हैं कि लेखक एक और रचनाकार होता है जो कि न सिर्फ साहित्यिक रचनाएँ करता है, बल्कि ढेर सारे चरित्रों का निर्माता भी होता है।

  1. परिवार के अलावा आपकी प्रेरणा क्या है?

उत्तर:- यह बात सही है कि परिवार ही सबसे बड़ी प्रेरणा होता है। मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है। परिवार के बाद वो सारे लोग मेरी प्रेरणा हैं, जिन्होंने अपनी जिन्दगी में संघर्ष किया और हार नहीं माने। वो जीते या हार गए इससे फर्क नहीं पड़ता। मैं ऐसे लोगों की जीवनी खोज-खोज कर पढता हूँ। हालाँकि मुझे आज तक ऐसा एक भी उदाहरण नहीं मिला जिसने अपनी जिन्दगी में अथक संघर्ष किया और वो असफल हो गए।

  1. अपने बारे में कुछ बताइए।

उत्तर:- वैसा कुछ विशेष मेरे बारे में जानने लायक है नहीं। मैं सत्ताइस साल का एक आम बिहारी लड़का हूँ, जिसे अपने होम टाउन ‘मोकामा’ से बहुत ही ज्यादा प्यार है। पिछले आठ सालों से भारतीय वायुसेना में कार्यरत हूँ। फ़िलहाल मेरी पोस्टिंग भटिंडा (पंजाब) में है। अब तक मेरी दो किताबें प्रकाशित हुई हैं। पहली किताब “एक्स गर्लफ्रेंड” को लोगों ने खूब पसंद किया और उसका पहला संस्करण समाप्त हो चुका है। अब मार्केट में उसका पहला रीप्रिंट आ चुका है। दूसरी किताब “और कितनी निर्भया” को भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं। लोगों का यह प्यार पाकर दिल भर जाता है।

  1. खुद की पुस्तक पकड़कर एक विशेष भावना हमेशा होती है। आपके लिए यह कैसा एहसास था?

उत्तर:- मेरी पहली किताब अप्रैल 2017 में आई थी और तब जब मैंने किताब को हाथ में लिया था, तो मुझे ठीक वैसा ही लग रहा था, जैसे नौ महीने अपनी कोख में पालने के बाद उसकी गोद में अपने बच्चे को देखते हुए लगता होगा।

मैं भटिंडा में अपने कलीग्स के साथ था और किताब लेकर मेरे एक सीनियर ‘विकास कुमार’ आये। उनसे किताब लेकर जब मैंने अपने हाथ में लिया तो मैं भावुक हो गया था। मेरे लिए यह एक बहुत ही अलग किस्म का एहसास था।

  1. पसंदीदा लेखक कौन हैं? आपकी पसंदीदा पुस्तक क्या है?

उत्तर:- मेरे सबसे पसंदीदा लेखक प्रेमचंद हैं। पसंदीदा किताबों में मेरी सबसे पसंदीदा किताबें, “कितने पाकिस्तान”, “द अल्केमिस्ट”, “चित्रलेखा” और “निठल्ले की डायरी” है।

नए लेखकों में मुझे इंदिरा दाँगी बहुत पसंद हैं। वहीं नयी किताबों में “डार्क हॉर्स”, “दिल्ली दरबार” और अपनी दोनों किताबें मुझे बहुत पसंद हैं।

  1. पाठक की (अच्छी और बुरी) प्रतिक्रिया की कुछ यादें साझा करें।

उत्तर:- जब आप कुछ लिख रहे हैं तो यह जरुरी नहीं है कि वो सबको पसंद ही आये। इसलिए अच्छी और बुरी प्रतिक्रियाएं दोनों हमेशा स्वागत योग्य होती हैं।

इस मामले में मैं थोड़ा भाग्यशाली रहा हूँ कि मुझे नकारात्मक प्रतिक्रिया थोड़ी कम मिली है। अभी तक मुझे सबसे अच्छी प्रतिक्रिया धीरेन्द्र जी की मिली है। जिन्हें मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूँ और अमेज़न पर उन्होंने काफी अच्छी प्रतिक्रिया लिखी है। दूसरी सबसे अच्छी प्रतिक्रिया अभिषेक सूर्यवंशी जी की है जिन्होंने बताया है कि उन्हें किताब इतनी ज्यादा पसंद आई है कि अभी तक चार बार खरीद चुके हैं। बाकी फेसबुक के इनबॉक्स में और ईमेल पर जब भी प्रतिक्रियाएं आती हैं, तो दिल खुश हो जाता है। हाँ, नकारात्मक प्रतिक्रिया से थोड़ी मायूसी तो होती है, मगर यह पता भी चलता है कि अभी लेखन में बहुत ज्यादा सुधार की जरुरत है।

  1. अन्य शौक क्या हैं?

उत्तर:- लिखने के अलावा पढना, फ़िल्में देखना और घूमना मुझे बहुत ज्यादा पसंद है। भारतीय वायुसेना में रहते हुए घूमने का मेरा शौक भी बहुत ही आसानी और मजे से पूरा हो जाता है।

अभी तक असम से लेकर राजस्थान और कर्नाटक से लेकर जम्मू घूम चुका हूँ। आगे यूरोप घूमने का बहुत ज्यादा मन है। अनुराधा बेनीवाल की किताब “आजादी मेरा ब्रांड” पढने के बाद यह इच्छा और भी तीव्र हो गयी है, अब देखना यह है कि यूरोप जाना कब संभव हो पाता है।

  1. लेखन की अगली योजना क्या है?

उत्तर:- अगली किताब लिखी जा रही है, पूरा होते ही सबके सामने होगी।

  1. आपको लगता है कि लेखन कठिन है?

उत्तर:- बहु प्रसिद्ध अमेरिकन-जर्मन कवि “चार्ल्स बुलोस्की” की एक कविता है, “तुम लेखक बनना चाहते हो”। उसमें उन्होंने बताया है कि कब आपको लिखना चाहिए और क्यों आपको नहीं लिखना चाहिए। उस कविता को पढ़कर मुझे बहुत ही सुकून मिला क्योंकि लिखने के लिए जो बात अपने अन्दर होनी चाहिए उनमें से ज्यादातर बातें मैं महसूस करता हूँ।

उनकी कविता की कुछ पंक्तियाँ है,

“जब तक तुम्हारी आत्मा की जमीन से

लम्बी दूरी के मारक राकेट जैसे

नहीं निकलते लफ्ज तब तक चुप रहना।”

और मुझे कभी ऐसा लगता ही नहीं कि मुझसे लिखने के लिए कुछ सोचना पड़ता है। मुझे लिखने में कोई मुश्किल नहीं होती, नहीं लिखता हूँ तो कठिनाई होने लगती है।

  1. आपने पहली बार कब महसूस किया कि भाषा में दिलों को बाँधने की शक्ति है?

उत्तर:- मैंने पहले ही बताया है कि मेरे पसंदीदा लेखक प्रेमचंद हैं। मुझे नहीं लगता उनके जैसा कोई और शब्दों से दिलों में उतर सकता है।

बचपन में मैंने जब “पूस की रात” कहानी पढ़ी थी तो ऐसा लगा था जैसे सबकुछ मेरे सामने घटित हो रहा था और मेरी साँसें बहुत ही तेज चलने लगी थीं। उस कहानी को पढने के बाद ही मुझे यह यह्सास हो गया कि भाषा में दिलों को बाँधने की शक्ति है।

  1. आप किस शैली को लिखना पसंद करते हैं।

उत्तर:- मैं वैसी शैली में लिखना पसंद करता हूँ जो लोगों के लिए सहज और लोगों को पसंद आये।

  1. लिखते समय और प्रकाशित होते समय आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

उत्तर:- जिंदगी चुनौतियों से ही भरी होती है, मेरी जिंदगी में भी कुछ चुनौतियाँ आयीं। लिखने में मुझे जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा या अभी भी करना पड़ता है, उसे बताना मैं उचित नहीं समझता और प्रकाशित होते समय मुझे किसी विशेष चुनौती का सामना नहीं करना पड़े और दोनों किताबों के लिए मुझे अच्छे प्रकाशक ही मिले।

  1. आपके प्यारे पाठकों के लिए कुछ शब्द।

उत्तर:- आपसे ही हम हैं, आपके बिना कुछ भी नहीं। अपनी मोहब्बत बस यूँ ही बनाए रखिये।

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